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हिन्दी फिल्मी गीतों में बरसता सावन

रिमझिम के तराने लेकर———————-आई बरसात

लेख
गोवर्धन यादव

स्वाधीनता विशेषांक
अगस्त, 2026

— बरसात को लेकर गीतकारों ने जमकर गीत लिखे। उनके गीताें ने फिल्मों में धूम मचा दी। उन्होंने बरसात को माध्यम बनाकर एक नया संसार रचा।
एक नयी चेतना को आयाम दिया और उसे सदा-सदा के लिए अमर बना दिया। —

अगर कोई मुझसे पूछे कि तुम्हें कौन सा मौसम सुहावना लगता है, तो मैं बिना समय गवाएं कह सकता हूं कि मुझे तो सिर्फ बरसात का मौसम सुहाना लगता है। यह वह समय होता है जब आसमान से इन्द्र देवता धरती पर अमृत की वर्षा कर रहे होते हैं। इस बरसती बूंदों में कौन भला भींगना नहीं चाहेगा? तन भींगता ही भींगता है, साथ में मन भी भींगता रहता है।
बारिश की पहली फंवार के साथ ही धरती का कोना-कोना हरियाली की चादर से ढंक जाता है। शीतल मंद-मंद हवा के झोके आपके शरीर को छूकर आगे बढ़ जाते हैं। कौन भला इन सुखद हवा के झूलों में झूलना नहीं चाहेगा? पेड़ों ने हरियली बाना पहन लिया है। उनकी लचकदार डालियों में, कोई कच्ची कली अपना घूंघट खोले, रसिक भौरों को आमंत्रण दे रही होती है। नए पत्तों से लदी-फदी किसी घनी डाली पर बैठी कोयल कुहू-कुहू की स्वर लहरी बिखेर रही होती है। झिंगुरों को कौन क्या कहे वे अपनी टिर्र-टिर्र से पूरा वातावरण गूंजाने लगते हैं। वे अपनी ही मस्ती में खोए हुए हैं, कान उनकी टिर्र-टिर्र सुनना नहीं चाहते, लेकिन मजबूर है, आठ महीने धरती के गर्भ में अपने को छिपाए बैठे मेंढक अब बाहर निकल आते हैं। वे भी अपने आप में किसी सिद्ध गायक की तरह अपने को पेश करने में लगे हैं। कौन क्या सुनना चाहता है, किसे कौन सा राग पसंद है, उन्हें इससे मतलब नहीं, वे तो अपने ढर्रे पर उतर आए हैं और अपनी टर्र-टर्र की आवाज निकालने में मस्त हैं। शायद उन्हें इस बात का भ्रम बना रहता है कि वे राग मल्हार ही गा रहे हैं।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सभी प्राणी इस रिमझिमाते मौसम में खुश हैं। खुश तो ढोर-डंगर भी हैं जिन्हें हरी-हरी मुलायम घास खाने को जो मिलने लगी है। खुश तो बेचारे तब भी थे, जब सूखी घास को खाकर किसी तरह अपना उदर-पोषण कर रहे थे। सूखी घास में वह सुख कहां जो हरी-हरी घास में रहती है। हरा चारा चर कर वे खुश तो हो ही रहे हैं, साथ ही ग्वाला भी खुश हो रहा है। जहां वह पाव भर दूध निचोड़ता था, अब किलो से दुह रहा है। कृषक भी खुश है कि उसका खेत फसलों से लहलहा रहा है। एक साथ कई उम्मीद बलवती हो उठती है कि इस बार फसल भरपूर होगी। तो वह अपनी सयानी होती बेटी को डोली में बिठाकर विदा कर सकेगा, साहूकार के कर्ज का बोझ उतार सकेगा। अपने मुन्ना मुन्नी के लिए नए कपड़े सिलवा सकेगा। गले में नकली सोने की चेन पहने अपनी प्रियतमा को कम से कम तोला दो तोला का हार ही बनवा देगा। ताल, तलैया, नदी, नाले सभी खुश हैं कि उनकी प्यास बुझ जाएगी। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि पूरा संसार इस हरियली माहौल में खुश नजर आ रहा है।
इन बरसती फुंवारों में सभी खुश हो रहे हों, यह कतई जरूरी नहीं है। रिमझिम के तराने गाती बरसात जहां एक ओर ठंडा माहौल बनाने में मगन है, वहीं दूसरी ओर कोई नव-यौवना के मन में विरह की भीषण आग भी लगा जाती है। उसकी प्रेमी यह कहकर गया था कि वह बादलों के साथ लौट आएगा, वह अब तक आया नहीं है और न ही बैरन डाकिया अब तक उसकी कोई पाती ही लेकर आया है। जैसे-जैसे बारिश तेज होती है, उसके कलेजे की आग वैसे-वैसे भड़कती जाती है, एक ओर बरसात की झड़ी तेज होती जाती है, ठीक वैसे ही उसकी कजरारी आंखों से विरहा के बादल फटकर बरसने लगते हैं, कहीं कोई निर्वासित, अभिशप्त यक्ष, पहाड़ की ऊंचाइयों पर चढ़कर, किसी मेघ के आने की प्रतीक्षा में, अपनी देह को कृषकाय करता हुआ, पाती भेजने की जुगाड़ में लगा हुआ होता है। किसी प्रेमी को किसी आवश्यक काम से जाना जरूरी होता है, तो उसकी प्रेमिका गलहार बनकर उससे अनुनय करती है कि बरसात की इस सुहानी घड़ी में उसे अकेला छोड़कर न जाए या फिर बादलों से गुहार लगाकर कहती है कि इतना बरसों की उसका प्रेमी घर के बाहर कदम निकालने की भी न सोचें।
बरसात के इस सुहाने मौसम को लेकर गीतकारों न जमकर गीत लिखे। उनके लिखे गीताें ने फिल्मों में धूम मचा दी। हम सब उन तमाम फिल्मों के निर्माताओं, गीतकारों, संगीतकारों, कलाकारों के ट्टणी हैं कि उन्होंने बरसात को माध्यम बनाकर एक नया संसार रचा। उसे सदा-सदा के लिए अमर बना दिया।
बरसात पर लिखे गए सिचुएशन को देखकर भी इस्तेमाल किए गए अधिकतर गीतों में बारिश का प्रयोग दृश्य को रोमांटिक पुट देने के लिए किया गया, जिसमें प्यार था, मस्ती थी, रोमांस था, उल्ल्हास था, उमंग थी। इसके अलावा बारिश के गीतों में अलग-अलग मूड के कई गीत भी थे। कुछ विरह का पुट लिए हुए था, तो कोई मोहब्बत का पैगाम भेजते हुए था।
फिल्म रतन का गीत-‘‘सावन के बादलों’’ जबरदस्त हिट हुआ। फिल्म गुरु का गीत ‘‘बरसो रे मेघा बरसो’’। बरसात की बात चल रही हो तो फिल्म बरसात को कैसे भूला जा सकता है—‘‘हम से मिले तुम सजन’’, फिल्म 420 का बेहद लोकप्रिय गाना-‘‘प्यार हुआ इकरार हुआ’’ शोमैन राजकपूर और नरगिस गाते हैं और बरसात——————-

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