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प्रकृति के संरक्षण और भारत की समृद्धि के लिये 150 अरब फलदार पेड़ लगाओ अभियान


पर्यावरण लेख
के. एन. गोविंदाचार्य
जाह्नवी जून 2026 अंक
पर्यावरण विशेषांक


पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार 1 मनुष्य पर 100 पेड़ पर्यावरण के लिए उत्तम अवस्था है। भारत की आबादी 1-50 अरब होने जा रही है, इसलिए भारत में 150 अरब पेड़ लगाना हमारा दायित्व बन जाता है।

प्रकृति के दोहन के बदले शोषण पर आधारित मानव केन्द्रित विकास के कारण जलवायु परिवर्तन रूपी भीषण संकट तक मानवता पहुंच चुकी है। उस जलवायु परिवर्तन रूपी संकट के निवारण का दीर्घकालिक उपाय है- प्रकृति केन्द्रित विकास। तात्कालिक रूप से भी ऐसे उपाय होने चाहिए जो प्रकृति केन्द्रित विकास के अनुकूल हो।
जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञों ने एक उपाय सुझाया है-1000 अरब (1 ट्रिलियन) नए पेड़ लगाना। भारत में विश्व की 15% से अधिक आबादी रहती है। पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार एक मनुष्य पर 100 पेड़ होना, पर्यावरण के लिए उत्तम अवस्था है। भारत की आबादी 1-50 अरब होने जा रही है, इसलिए भारत में 150 अरब पेड़ लगाना हमारा दायित्व बन जाता है
भारत के कुल क्षेत्रफल में वनभूमि केवल 21-75% है। अन्य पेड़ों से आच्छादित भूमि को जोड़ने पर लगभग 25% भाग होता है। पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार पर्यावरण संतुलन के लिए किसी भी देश के 33% से अधिक भाग पर पेड़ होने चाहिए। भारत में वन भूमि केवल 21-75% ही है। अतः 33% से अधिक भाग पर वनाच्छादन करने के लिए किसानों की निजी भूमि पर पेड़ लगाने होंगे।
पंच स्तरीय बागवानी में एक हेक्टेयर में छोटे बड़े मिलाकर 5 हजार पेड़ लगते हैं। जापानी वैज्ञानिक द्वारा विकसित मियावाकी पद्धति में एक हेक्टेयर में 20 से 25 हजार पेड़ लगते हैं। ऐसे और भी प्रयोग हुए होंगे, उनका भी लाभ लिया जाना चाहिए। अनानास के 20 हजार पौधे प्रति हेक्टेयर से आम के 1 हजार पेड़ प्रति हेक्टेयर, ऐसे सबको मिलाकर 5 हजार फलदार पेड़ प्रति हेक्टेयर में लगाए जाएं। अगर पंच स्तरीय बागवानी पद्धति से किसानों के खेतों में फलदार पेड़ लगाते हैं, तो 150 अरब फलदार पेड़ लगाने के लिए लगभग 300 लाख हेक्टेयर (30 मिलियन हेक्टेयर) भूमि होगी। वह भूमि भारत के कुल क्षेत्रफल के लगभग 10% है। अतः किसानों की उतनी भूमि पर पेड़ लगाने से भारत में वनाच्छादन 35% तक हो जाएगा।
150 अरब फलदार पेड़ लगाने से न केवल भारत जलवायु परिवर्तन की रोकथाम में सहयोग करेगा, बल्कि किसानों की आर्थिक समृद्धि में भी सहायक होगा। क्योंकि पंच स्तरीय बागवानी कर रहे किसानों के अनुभव के अनुसार उनकी आय में सामान्य खेती से अनेक गुना वृद्धि हुई है।
जलवायु परिवर्तन की रोकथाम केवल सरकारों का कार्य नहीं है, इसमें समाज की भी भूमिका है। हमारी क्षमता के अनुसार उसमें योगदान करना, हम सबका दायित्व है। देश में हजारों लोग हैं, जो संकल्प ले लें तो एक दशक में ही यह कार्य हो सकता है। मुंबई के श्री मयंक गांधी ने एक दशक से कम समय में 7 करोड़ से अधिक फलदार पेड़ लगवाने का चमत्कार करके दिखाया है। हजारों लोगों में वैसा कर दिखाने की सामर्थ्य है, इसका मुझे पूर्ण विश्वास है।

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