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बागवानी से मन को भी शान्ति मिलती है

लेख
हरीशचन्द्र पांडे

जुलाई, 2025 स्वास्थ्य विशेषांक

बागवानी दुनिया की सबसे अच्छी तथा सस्ती दवा है जो उदासी, दुःख, तनाव को दूर करके हमारी मानसिक
शारीरिक सेहत दुरुस्त करने में काफी मददगार है।

आजकल बागवानी अनेक लाभ प्रदान कर रहा है। गमले में रोेपे हुए फूल, पौधे, बेल तथा साग सब्जी से एक नहीं अनेक लाभ हैं। पर्यावरण की सेवा, तितली, गौरैया, गिलहरी को आवास मिलता है तथा निःशुल्क सब्जी इनमें से प्रमुख फायदे हैं।
अगर यह कहा जाए कि बागवानी शारीरिक मानसिक समस्याओं को सुलझाने, आराम की स्थिति में लाने और मन को प्रफुल्लित करने की ‘मूल चाबी’ है तो गलत नहीं होगा। बागवानी ऐसी सरल कार्यकलाप या व्यायाम है जो हमें आरामदायक स्थिति में लाती है। यह दुनिया की सबसे अच्छी तथा सस्ती दवा है जो उदासी, दुःख, तनाव को दूर करके हमारी मानसिक शारीरिक सेहत दुरुस्त करने में काफी मददगार है। अगर आपके पास बहुत सारी जगह नहीं भी है तो सात-आठ गमले बरामदे या बालकनी में रखकर भी बागवानी का आनंद और लाभ दोनों पाये जा सकते हैं।
कुछ देर की बागवानी तनाव पैदा करने वाले कारणों को कम करके आरामदायक स्थिती में लाने में मदद करती है। यह हथेली, ऊंगलियों और दिमाग की एक ऐसी क्रिया है जिसमें अमूमन 10 से 12 मांसपेशियां शामिल होती हैं। पौधों, माटी और पानी से जुड़ाव की क्रिया में हमारा हाथ, गर्दन, फेफड़े और दिल जैसे अंग शामिल होते हैं।
बागवानी और इसके स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए दुनिया के सौ से भी अधिक देशों में बागवानी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बुुजुर्ग लोगों को एकाकी लोगों को अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बागवानी से जोड़ा जा रहा है।
इस मुहिम का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीने में बागवानी के लाभों से अवगत कराना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ हरियाली से लगाव कि क्रिया को एक सरलतम योग भी कहते हैं। अगर व्यक्ति अपनी रोजमर्रा के व्यस्ततम समय में से कुछ समय हरियाली देखने, पौधे सींचने व गुड़ाई निराई आदि में बिताता है तो वह शारीरिक मानसिक रूप से आराम की स्थिति में अपने को पाता है। और अधिक ऊर्जा के साथ दूसरे काम को कर सकता है।
शरीर पर सकारात्मक प्रभाव
पौधों के समीप रहने से दिमागी तनाव कम हो जाता है। जब हम पानी से सिंचाई करते हैं तो शरीर में एडोर्फिन और ऑक्सिटोसिन जैसे अच्छा महसूस करने वाले हार्मोन प्रवाहित होते हैं। शरीर अपने को बेहतर महसूस करता है। तनाव का स्तर कम होता है। एड्रिनलिन तनाव हार्मोन भी कम हो जाते हैं। सहानुभूति तंत्रिका तंत्र भी शांत हो जाता है। गमले या क्यारी आदि साफ करने से आप अपने दिल दिमाग के बोझ कोे कम करते हैं। मन बहलता है। माटी के पास रहने से आपके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। काम पर अच्छे से अपने को केन्द्रीत कर पाते हैं।
दिल रहता है स्वस्थ
तनावग्रस्त रहने से हमारा हृदय की धड़कन भी बढ़ता है, शरीर में सहानुभूति तंत्रिका तंत्र सक्रिय रहता है, हमारा शरीर हमेशा उत्तेजित अवस्था या लड़ने की स्थिति में रहता है। जब हम पौधों के पास हैं, तो सहानुभूति तंत्रिका तंत्र अपने आप आराम में आ जाता है। हृदय का तनाव और हृदय की धड़कन कम हो जाती है। परेशानी में होने के बाद भी दिल की धड़कनें असामान्य नहीं होतीं। हम समस्याओं को सही तरीके से सुलझा पाते हैं। हमारे फील गुड हार्मोन्स इन्हें बराबर कर देते हैं। हरियाली के आसपास रहने के दौरान, चिड़िया आदि को देखते हुए रक्तचाप 20 फीसदी तक तेज होता है, सांसें तेज होती हैं, हृदय को पंप करने में भी यह मदद करता है, धड़कनें बढ़ती है, ऊर्जा की खपत होती है। बागवानी से हमारा रक्तचाप…………….

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