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जीवन में बदलाव चाहते हैं तो एक प्रयोग कीजिये

लेख
हरीशचन्द्र पांडे

नवम्बर, 2025 अंक

बिना किसी भय या संकोच के, जरा ठहर कर काम को तसल्ली माध्यम से कर अपने भीतर की सृजनशीलता को उजागर कर सकते हैं।

अगर किसी कारण से आप अपने आप को बदलना चाहते हैं। तो एक दिन ध्यान में निकालें। अपने जीवन को सरल और सहज बनाने के लिए ध्यान सबसे उत्तम है। ध्यान से मन का बोझ भी कम होने लगता है।
मगर इसके लिए एक ही जगह पर बैठे रहने की जरूरत नहीं है। ध्यान तो कर्म करते हुए भी किया जा सकता है।
इसके लिए बस इतना करना है कि एक-एक काम को बेहद तसल्ली के साथ करते जाना है। इसके लिए पहले से एक योजना बना लें और एक पूरा दिन आहिस्ता-आहिस्ता गति में पूरा करने के लिए संकल्प करें। इससे आपको एक अनोखी शांति का अनुभव होने लगेगा।
अपने घर में, काम पर, खाना खाते हुए व अन्य कार्यों में थोड़ा सा धीमा हो जाएं। जो भी आपकी गति रही है, अपना तरीका उससे आधा कर दें। एक काम खत्म कर ही दूसरे की ओर चलें और जरा भी जल्दबाजी नहीं दिखायें। इसके बाद आप अपनी प्राकृतिक लय को खोलने के लिए अपने आप को शाबाशी भी दें और इस नये से अनुभव का पूरा आनंद पायें।
इससे एक बहुत बड़ा लाभ प्राप्त होगा। आप अपने उन विचारों को बदल सकते हैं जो आपको बार-बार परेशान करते रहते हैं। हौले-हौले काम करते रहिये और विचार कीजिए कि ऐसे कौन से विचार हैं जो आपको अक्सर बेचैन करते रहते हैं। आपको पीड़ा देते हैं? यह विचार कि किसी ने आपके साथ क्या किया या किसी ने किसी और के साथ क्या किया, इसके बारे में भी आप सोचकर ध्यान-मग्न हो सकते हैं।
अब इस पर अपनी प्रतिक्रिया के बारे में सोचेंं। क्या आप इन विचारों को छोड़ सकते हैं? जानिए कौन से विचार आपके उलझे हुए जीवन के लिए जिम्मेदार हैं। उनको तुरंत छोड़ते जायें और अपने जीवन का समाधान कर सकते हैं।
हौल-हौले अपने काम ध्यान से और बगैर भागमभाग के पूरे करना सिर्फ एक साधना नहीं, बल्कि आत्मा की परिष्करण का एक तरीका है। जब हम जल्दबाजी को त्याग कर सुकून और आराम की अनोखी दशा से जुड़ते हैं, तब चाहे वह कोई भी काम हो, उस समय, हम न केवल अपनी आत्मा को उजागर करते हैं, बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण से समझते हैं। यह तरीका हमें अपने भीतर की गहराई को जानने और दुनिया से जुड़ने का एक अनमोल अवसर देती है। इसलिए, बिना किसी भय या संकोच के, जरा ठहर कर काम को तसल्ली माध्यम से कर अपने भीतर की सृजनशीलता को उजागर कर सकते हैं।
आस्ट्रिया के महान मनोवैज्ञानिक डॉ- सिगमंड फ्रायड अपने घर पर बने बगीचे में टहल रहे थे। तब उनका एक परिचित उनसे …………………………………


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